घुमक्कड़ क्या शब्द है ,

बचपन में जब कोई बोलता था , तो बुरा सा लगता था कुछ , पर जबसे लोगों के जूनून को देखा तो लगा की ये भी कहने में जितना आसान लगता है उतना आसान नहीं है ,

लोग गर्मी , बारिस , शर्दी और भी बहुत की परिस्थितियों से गुजरते हुए जब अपने सफ़र से गुजरते है , तो दिल खुश हो उठता है , और लगता है में भी इनके साथ चल दू कही दूर ,

पर जिन्दगी भी इतनी आसानी से कही जाने भी तो नहीं देती , 

कुछ बंधन , कुछ ख्वाइसें और सबसे अहम् जिन्दी में कुछ कर दिखाना ,

और आसान शब्दों में कहू तो अपने पैरों में खड़े हो जाना ,

पर घुमक्कड़ी भी अजीब है , जितना रोकूँ  खुद को उतना अपनी ओर  बुलाती है ,

और हम चल देते है ,

और सच कहू तो बहुत सुकून मिलता है ,

और फिर आके लग जाते है खुद के पैरों को मज़बूत करने , की अपने पैरों पर खड़ा हो जाऊ , और एक नया सफ़र तय कर पाऊँ